Friday, August 8, 2014

मेरी पोस्ट (हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव को बिनम्र श्रद्धांजली) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया में














प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी पोस्ट (जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया )  को जागरण जंक्शन में शामिल किया गया है .




Dear User,



Thanks!
JagranJunction Team



हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव

हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव को बिनम्र श्रद्धांजली 
भगबान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिबार को दुःख कि इस काल में धैर्य दें।  
हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव का सोमवार देर रात निधन हो गया. वह 85 साल के थे.28 अगस्त 1929 को आगरा में जन्मे यादव की गिनती चोटी के लेखकों में होती रही है। वह मुंशी प्रेमचंद की पत्रिका हंस का 1986 से संपादन करते रहे थे जो हिन्दी की सर्वाधिक चर्चित साहित्यिक पत्रिका मानी जाती है और इसके माध्यम से हिन्दी के नये लेखकों की एक नई पीढ़ी भी सामने आई और इस पत्रिका ने दलित विमर्श और स्त्री विमर्श को भी स्थापित किया।यादव के प्रसिद्ध उपन्यास सारा आकाश पर बासु चटर्जी ने एक फिल्म भी बनाई थी। उनकी चर्चित कृतियों में जहां लक्ष्मी कैद है..,छोटे छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल जैसे कहानी संग्रह और उखड़े हुये लोग, शह और मात, अनदेखे अनजान पुल तथा कुलटा जैसे उपन्यास भी शामिल है। उन्होंने अपनी पत्नी मन्नू भंडारी के साथ एक इंच मुस्कान नामक उपन्यास भी लिखा। यादव ने विश्व प्रसिद्ध लेखक चेखोव तुर्गनेव और अल्वेयरकामो जैसे लेखकों के कृत्यों का भी अनुवाद किया था। यादव ने आगरा विश्वविद्यालय से एमए किया था और वह कोलकता में भी काफी दिनों तक रहे। वह संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रसार भारती के सदस्य भी बनाये गये थे।अपने लेखन में समाज के वंचित तबके और महिलाओं के अधिकारों की पैरवी करने वाले राजेंद्र यादव प्रसिद्ध कथाकार मुंशी प्रेमचंद की ओर से शुरू की गई साहित्यिक पत्रिका क्लिक करें हंस का 1986 से संपादन कर रहे थे.अक्षर प्रकाशन के बैनर तले उन्होंने इसका पुर्नप्रकाशन प्रेमचंद की जयंती 31 जुलाई 1986 से शुरू किया था.
प्रेत बोलते हैं (सारा आकाश), उखड़े हुए लोग, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), अनदेखे अनजान पुल, शह और मात, मंत्रा विद्ध और कुल्टा उनके प्रमुख उपन्यास हैं.
इसके अलावा उनके कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं. इनमें देवताओं की मृत्यु, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक और वहाँ पहुँचने की दौड़ प्रमुख हैं. इसके अलावा उन्होंने निबंध और समीक्षाएं भी लिखीं.
आवाज़ तेरी के नाम से राजेंद्र यादव का 1960 में एक कविता संग्रह भी प्रकाशित हुआ था. चेखव के साथ-साथ उन्होंने कई अन्य विदेशी साहित्यकारों की रचनाओं का हिंदी में अनुवाद भी किया था.उनकी रचना सारा आकाश पर इसी नाम से एक फ़िल्म भी बनी थी.
राजेंद्र यादव ने कमलेश्वर और मोहन राकेश के साथ मिलकर हिंदी साहित्य में नई कहानी की शुरुआत की थी.लेखिका मन्नू भंडारी के साथ राजेंद्र यादव का विवाह हुआ था. उनकी एक बेटी हैं. उनका वैवाहिक जीवन बहुत लंबा नहीं रहा और बाद में उन्होंने अलग-अलग रहने का फ़ैसला किया था.
हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर राजेंद्र यादव को बिनम्र श्रद्धांजली 
भगबान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिबार को दुःख कि इस काल में धैर्य दें।




प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

मेरी पोस्ट (ग़ज़ल :सच्ची और दिल की बात ) को जागरण जंक्शन में

मेरी पोस्ट (ग़ज़ल :सच्ची और दिल की बात ) को जागरण जंक्शन में 








प्रिय मित्रों मुझे ये बताते हुए बाहर हर्ष हो रहा है कि मेरी पोस्ट (ग़ज़ल :सच्ची और दिल की बात ) को जागरण जंक्शन में शामिल किया गया है।
आप भी अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएं


 Your ग़ज़ल(सच्ची और दिल की बात) has been featured on Jagran Junction

Click Here to visit your blog : मैं, लेखनी और जिंदगी

Thanks!
JagranJunction Team


http://madansbarc.jagranjunction.com/2014/03/21/%E0%A5%9A%E0%A5%9B%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%A4/


ग़ज़ल(सच्ची और दिल की बात)


किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की
अपने ख्बाबों और ख़यालों में सभी मशगूल दिखतें हैं
दुनिया में जिधर देखो हज़ारों रास्ते दीखते
मंजिल जिनसे मिल जाये बह रास्ते नहीं मिलते हैं
सबक क्या क्या सिखाता है जीबन का सफ़र यारों
मुश्किल में बहुत मुश्किल से अपने दोस्त दिखतें हैं
क्यों सच्ची और दिल की बात ख़बरों में नहीं दिखती
नहीं लेना हक़ीक़त से और मन से आज लिखतें हैं
धर्म देखो कर्म देखो असर दीखता है पैसों का
भरोसा हो तो किस पर हो सभी इक जैसे दिखतें हैं
सियासत में न इज्ज़त की न मेहनत की कद्र यारों
सुहाने स्वप्न और ज़ज्बात यहाँ हर रोज बिकते हैं


प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

मेरी पोस्ट धनतेरस का पर्ब (परम्पराओं का पालन या रहीसी का दिखाबा ) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया में

मेरी पोस्ट धनतेरस का पर्ब (परम्पराओं का पालन या रहीसी का दिखाबा ) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया में 





प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी पोस्ट धनतेरस का पर्ब (परम्पराओं का पालन या रहीसी का दिखाबा ) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया )  को जागरण जंक्शन में शामिल किया गया है .

 http://madansbarc.jagranjunction.com/2013/10/31/%E0%A4%A7%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AC-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82/


Dear User,

Your धनतेरस का पर्ब (परम्पराओं का पालन या रहीसी का दिखाबा ) has been featured on Jagran Junction

Click Here to visit your blog : मैं, लेखनी और जिंदगी

Thanks!
JagranJunction Team









धनतेरस का पर्ब (परम्पराओं का पालन या रहीसी का दिखाबा )
आज   यानि शुक्रबार ,दिनांक नवम्बर एक दो हज़ार तेरह को पुरे भारत बर्ष में धनतेरस मनाई जायेगी। सबाल ये है कि आज के समय में कितनी जरुरत है धनतेरस को मनाने की।रीति रिवाजों से जुडा धनतेरस आज व्यक्ति की आर्थिक क्षमता का सूचक बन गया है। एक तरफ उच्च और मध्यम वर्ग के लोग धनतेरस के दिन विलासिता से भरपूर वस्तुएं खरीदते हैं तो दूसरी ओर निम्न वर्ग के लोग जरूरत की वस्तुएं खरीद कर धनतेरस का पर्व मनाते हैं। इसके बावजूद वैश्वीकरण के इस दौर में भी लोग अपनी परम्परा को नहीं भूले हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार यह पर्व मनाते हैं।धनतेरस के दिन सोना, चांदी के अलावा बर्तन खरीदने की परम्परा है। इस पर्व पर बर्तन खरीदने की शुरुआत कब और कैसे हुई, इसका कोई निश्चित प्रमाण तो नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि जन्म के समय धन्वन्तरि के हाथों में अमृत कलश था। इस अमृत कलश को मंगल कलश भी कहते हैं और ऐसी मान्यता है कि देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा ने इसका निर्माण किया था। यही कारण है आम जन इस दिन बर्तन खरीदना शुभ मानते हैं।  
आधुनिक युग की तेजी से बदलती जीवन शैली में भी धनतेरस की परम्परा आज भी कायम है और समाज के सभी वर्गों के लोग कई महत्वपूर्ण चीजों की खरीदारी के लिए पूरे साल इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं।  हर साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी केदिन धन्वतरि त्रयोदशी मनायी जाती है। जिसे आम बोलचाल में 'धनतेरस' कहा जाता है। यह मूलत: धन्वन्तरि जयंती का पर्व है और आयुर्वेद के जनक धन्वन्तरि के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।          
आने वाली पीढियां अपनी परम्परा को अच्छी तरह समझ सकें। इसके लिए भारतीय संस्कृति के हर पर्व से जुडी कोई न कोई लोक कथा अवश्य है। दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस पर्व से भी जुडी एक लोककथा है, जो कई युगों से कही, सुनी जा रही है।  पौराणिक कथाओं में धन्वन्तरि के जन्म का वर्णन करते हुए बताया गया है कि देवता और असुरों के समुद्र मंथन से धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। वह अपने हाथों में अमृत कलश लिए प्रकट हुए थे। इस कारण उनका नाम पीयूषपाणि धन्वन्तरि विख्यात हुआ। उन्हें विष्णु का अवतार भी माना जाता है।            
परम्परा के अनुसार धनतेरस की संध्या को मृत्यु के देवता कहे जाने वाले यमराज के नाम का दीया घर की देहरी पर रखा जाता है और उनकी पूजा करके प्रार्थना की जाती है कि वह घर में प्रवेश नहीं करें और किसी को कष्ट नहीं पहुंचाएं। देखा जाए तो यह धार्मिक मान्यता मनुष्य के स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन से प्रेरित है।           
यम के नाम से दीया निकालने के बारे में भी एक पौराणिक कथा है, एक बार राजा हिम ने अपने पुत्र की कुंडली बनवायी। इसमें यह बात सामने आयी कि शादी के ठीक चौथे दिन सांप के काटने से उसकी मौत हो जाएगी। हिम की पुत्रवधू को जब इस बात का पता चला तो उसने निश्चय किया कि वह हर हाल में अपने पति को यम के कोप से बचाएगी। शादी के चौथे दिन उसने पति के कमरे के बाहर घर के सभी जेवर और सोने-चांदी के सिक्कों का ढेर बनाकर उसे पहाड़ का रूप दे दिया और खुद रात भर बैठकर उसे गाना और कहानी सुनाने लगी ताकि उसे नींद नहीं आए।     
रात के समय जब यम सांप के रूप में उसके पति को डंसने आए तो वह सांप आभूषणों के पहाड़ को पार नहीं कर सका और उसी ढ़ेर पर बैठकर गाना सुनने लगा। इस तरह पूरी रात बीत गई और अगली सुबह सांप को लौटना पड़ा। इस तरह उसने अपने पति की जान बचा ली। माना जाता है कि तभी से लोग घर की सुख, समृद्धि के लिए धनतेरस के दिन अपने घर के बाहर यम के नाम का दीया निकालते हैं ताकि यम उनके परिवार को कोई नुकसान नहीं पहुंचाए।       
भारतीय संस्कृति में स्वास्थ्य का स्थान धन से ऊपर माना जाता रहा है। यह कहावत आज भी प्रचलित है 'पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में माया' इसलिए दीपावली में सबसे पहले धनतेरस को महत्व दिया जाता है, जो भारतीय संस्कृति के सर्वथा अनुकूल है।  धनतेरस के दिन सोने और चांदी के बर्तन, सिक्के तथा आभूषण खरीदने की परम्परा रही है। सोना सौंदर्य में वृद्धि तो करता ही है। मुश्किल घड़ी में संचित धन के रूप में भी काम आता है। कुछ लोग शगुन के रूप में सोने या चांदी के सिक्के भी खरीदते हैं।  दौर के साथ लोगों की पसंद और जरूरत भी बदली है इसलिए इस दिन अब बर्तनों और आभूषणों के अलावा वाहन मोबाइल आदि भी खरीदे जाने लगे हैं। वर्तमान समय में देखा जाए तो मध्यम वर्गीय परिवारों में धनतेरस के दिन वाहन खरीदने का फैशन सा बन गया है। इस दिन ये लोग गाड़ी खरीदना शुभ मानते हैं। कई लोग तो इस दिन कम्प्यूटर और बिजली के उपकरण भी खरीदते हैं।             
रीति रिवाजों से जुडा धनतेरस आज व्यक्ति की आर्थिक क्षमता का सूचक बन गया है। एक तरफ उच्च और मध्यम वर्ग के लोग धनतेरस के दिन विलासिता से भरपूर वस्तुएं खरीदते हैं तो दूसरी ओर निम्न वर्ग के लोग जरूरत की वस्तुएं खरीद कर धनतेरस का पर्व मनाते हैं। इसके बावजूद वैश्वीकरण के इस दौर में भी लोग अपनी परम्परा को नहीं भूले हैं और अपने सामर्थ्य के अनुसार यह पर्व मनाते हैं।


मदन मोहन सक्सेना

मेरी ग़ज़ल युबा सुघोष ,बर्ष -३ , अंक २ , अप्रैल २०१४ में



 

 

मेरी ग़ज़ल युबा सुघोष ,बर्ष -३ , अंक २  , अप्रैल  २०१४ में



प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल युबा सुघोष ,बर्ष -३ , अंक २  , अप्रैल  २०१४  में प्रकाशित हुयी है . आप भी अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएँ .




कुछ इस  तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है
न जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है...

लाचारी का दामन आज हमने थाम रक्खा  है 
उनसे किस तरह कह दे की उनकी सूरत प्यारी है

निगाहों में बसी सूरत फिर उनको क्यों तलाशे है
ना जाने ऐसा क्यों होता और कैसी बेकरारी है

बादल बेरुखी के दिखने पर भी क्यों मुहब्बत में 
हमको ऐसा क्यों लगता की उनसे अपनी यारी है

परायी लगती दुनिया में गम अपने ही लगते है
आई अब मुहब्बत में सजा पाने की बारी है

ये सांसे ,जिंदगी और दिल सब कुछ   तो पराया है
ब्याकुल अब  मदन ये है की बड़ती क्यों  उधारी  है  



ग़ज़ल :
मदन मोहन सक्सेना

मेरी पोस्ट मंगल पर मंगल ( भारत का प्रयास) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया में

मेरी पोस्ट मंगल पर मंगल ( भारत का प्रयास)  जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया में 




प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी पोस्ट मंगल पर मंगल ( भारत का प्रयास) जागरण जंक्शन फोरम सोशल मीडिया )  को जागरण जंक्शन में शामिल किया गया है .


 

Dear User,

Your मंगल पर मंगल ( भारत का प्रयास) has been featured on Jagran Junction

Click Here to visit your blog : मैं, लेखनी और जिंदगी

Thanks!
JagranJunction Team


http://madansbarc.jagranjunction.com/2013/11/05/%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AF%E0%A4%BE/

























मंगल पर मंगल ( भारत का प्रयास)
मंगल ग्रह के बारे में जानने की उत्सुकता पूरी दुनिया को है
देश-दुनिया के खगोलविदों के बीच अध्ययन के लिए
यह बेहद रोमांचक विषय रहा है.
अमेरिका और रूस समेत कई यूरोपीय देश
पिछले कुछ दशकों से मंगल ग्रह पर पहुंचने
और वहां इनसान को बसाने की संभावनाओं का पता लगाने में जुटे हुए हैं.
इस अभियान में भारत भी शामिल होना चाहता है.
आज
भारत ने अपने पहले मंगल ग्रह परिक्रमा अभियान (एमओएम) के लिए
ध्रुवीय रॉकेट को आज यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से
सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके इतिहास रच दिया.
चुनिंदा देशों में शामिल होने के प्रयास के लिए
भारत का यह पहला अंतर ग्रहीय अभियान है.
गल ग्रह के बारे में जानने की उत्सुकता पूरी दुनिया को है
देश-दुनिया के खगोलविदों के बीच अध्ययन के लिए
यह बेहद रोमांचक विषय रहा है.
अमेरिका और रूस समेत कई यूरोपीय देश
पिछले कुछ दशकों से मंगल ग्रह पर पहुंचने
और वहां इनसान को बसाने की संभावनाओं का पता लगाने में जुटे हुए हैं.
इस अभियान में भारत भी शामिल होना चाहता है.
उम्मीद की जा रही है कि यह अंतरिक्ष यान
इस ग्रह के दोनों हिस्सों की जानकारी मुहैया करा पाने में सक्षम होगा.
भारत इस मिशन के जरिये दुनिया को
यह संदेश देने के साथ ही यह भरोसा दिलाना चाहता है
कि उसकी तकनीक इस लायक है, जिसके सहारे
मंगल की कक्षा में अंतरिक्ष यान को भेजा जा सकता है.
इसके अलावा, इस मिशन का कार्य
मंगल पर जीवन की संभावनाओं का पता लगाना
इस ग्रह की तस्वीरें खींचना
और वहां के पर्यावरण का अध्ययन करना है.
इस अभियान में
अत्यधिक धन खर्च होने की आशंका जतायी गयी है
जिसके चलते इस अभियान की आलोचना भी की जा रही है
अंतरिक्ष यान के साथ कई प्रकार के प्रयोगों को अंजाम देने के लिए
अनेक उपकरण भी भेजे जा रहे हैं
इन सभी उपकरणों का वजन तकरीबन 15 किलोग्राम है
मंगल की सतह, वायुमंडल और खनिज आदि की जांच के लिए
उपकरण भेजे जा रहे हैं.
यह अंतरिक्ष यान मुख्य रूप से मंगल पर
मीथेन गैस की मौजूदगी बारे में पता लगायेगा.
मीथेन गैस को जीवन की संभावनाओं के लिए
एक अहम कारक माना जाता है.
यह बताया गया है कि लॉन्च होने के बाद
मार्स सैटेलाइट पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलने के बाद
करीब 10 महीने तक अंतरिक्ष में घूमता रहेगा.
इस दौरान वह अपने प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करेगा
और सितंबर, 2014 तक उसके मंगल की कक्षा तक पहुंच जाने की संभावना है.
किन्तु मौलिक चिंता का विषय
ये है कि
भारत में भले ही
हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने की योजना पूरी नहीं हुई हो
लेकिन देश का शीर्ष नेतृत्व और हमारे वैज्ञानिक
मंगल पर इनसान को बसाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं
इतना ही नहीं
देश में करोड़ों की आबादी शौचालय की सुविधा से महरूम हो
तो ऐसे में इस तरह के अभियान पर
अरबों रुपया पानी की तरह बहाना
कुछ हद तक चिंतनीय जरूर लगता है.
कुछ लोगों ने चिंता जतायी है
कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा
कि आखिरकार भारत मंगल मिशन को इतनी तवज्जो क्यों दे रहा है
जबकि देश में आधे से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं
और अब तक देश में आधे से अधिक परिवारों को
सरकार समुचित शौचालय
और स्वच्छ मौलिक सुविधाएं नहीं मुहैया करा पायी है.
इस अभियान के आलोचकों का तो यहां तक मानना है
कि एशिया में अब तक किसी भी देश ने
मंगल अभियान शुरू करने की हिम्मत नहीं जुटायी
तो भारत क्यों इस दिशा में आगे बढ़ रहा है
इसके जवाब में
इसरो के मुखिया राधाकृष्णन का कहना है
कि मंगल अभियान एक ऐतिहासिक जरूरत है
खासकर जब यहां पानी की खोज की जा चुकी है
तो इस ग्रह पर स्वाभाविक जीवन की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं.



प्रस्तुति :
मदन मोहन सक्सेना

मेरी पोस्ट (Valentine Week: जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाए) जागरण जंक्शन पर

मेरी पोस्ट (Valentine Week: जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाए)  जागरण जंक्शन पर







प्रिय मित्रों मुझे ये बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है की  मेरी पोस्ट (Valentine Week: जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाए)  जागरण जंक्शन पर शामिल की गयी है।  आप भी पोस्ट को पढ़कर  अपनी प्रतिक्रिया से अबगत करायें।



http://madansbarc.jagranjunction.com/2014/02/07/valentine-week-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%8C%E0%A4%A8-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF/


खूबसूरत सा एक पल कब किस्सा बन जाए
जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाए”

ये शब्द जब कभी भी मेरे कान में गूँजतें हैं मुझे उस पल की याद ताजा हो जाती है जब मैंने उसे पहली बार देखा था . कल तलक अनजान सी लगने बाली लड़की पता नहीं चला कब मेरे दिल कि मालकिन बन बैठी
किसी के दिल में चुपके से रह लेना तो जायज है
मगर आने से पहले कुछ इशारे भी किये होते

दिल में अजीब तरह सी हलचल हर पल होने लगी .लगने लगा जिंदगी प्यार से चलने बाली खूब सूरत गाड़ी है .
गर कोई हमसे कहे की रूप कैसा है खुदा का
हम यकीकन ये कहेंगे जिस तरह से यार है….

संग गुजरे कुछ लम्हों की हो नहीं सकती है कीमत
गर तनहा होकर जीए तो बर्ष सो बेकार है..

धीरे धीरे समय गुजरता गया लगने लगा पैर जमीन पर नहीं हैं
हर सुबह रंगीन अपनी शाम हर मदहोश है
वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला

चार पल की जिंदगी में ,मिल गयी सदियों की दौलत
जब मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला

नाज अपनी जिंदगी पर क्यों न हो हमको भला
कई मुद्द्दतों के बाद फिर अरमानो का पत्ता हिला

इश्क क्या है ,आज इसकी लग गयी हमको खबर
रफ्ता रफ्ता ढह गया, तन्हाई का अपना किला

वक़्त भी कुछ इस तरह से आज अपने साथ है
चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला

दर्द मिलने पर शिकायत ,क्यों भला करते मदन
दर्द को देखा ज दिल में मुस्कराते ही मिला
******************************
********************
खुशबुओं की बस्ती में रहता प्यार मेरा है
आज प्यारे प्यारे सपनो ने आकर के मुझको घेरा है
उनकी सूरत का आँखों में हर पल हुआ यूँ बसेरा है
अब काली काली रातो में मुझको दीखता नहीं अँधेरा है

जब जब देखा हमने दिल को ,ये लगता नहीं मेरा है
प्यार पाया जब से उनका हमने ,लगता हर पल ही सुनहरा है
प्यार तो है सबसे परे ,ना उसका कोई चेहरा है
रहमते उदा की जिस पर सर उसके बंधे सेहरा है

प्यार ने तो जीबन में ,हर पल खुशियों को बिखेरा है
ना जाने ये मदन ,फिर क्यों लगे प्यार पे पहरा है

प्यार प्रेम मुहब्बत सच मायने में खुदा की इंसान को दी हुयी सबसे अनमोल बक्शीश है .प्रेम से जिंदगी के हर मसले हल हो सकतें हैं .

मेरी ग़ज़ल (ज़माने की हकीकत) पायनियर अलायन्स हिंदी न्यूज़ वेव साईट में

मेरी ग़ज़ल (ज़माने की हकीकत) पायनियर अलायन्स  हिंदी न्यूज़    वेव साईट में


  







प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि मेरी ग़ज़ल (ज़माने की हकीकत) पायनियर अलायन्स  हिंदी न्यूज़    वेव साईट में शामिल की गयी है।  आप सब अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएं करायें। लिंक नीचे दिया गया है।


 http://pioneeralliance.in/readmore.php?ms=2143#.U14vH4_kJN2

दुनिया में जिधर देखो हजारो रास्ते दीखते
मंजिल जिनसे मिल जाए बह रास्ते नहीं मिलते

किस को गैर कहदे हम और किसको मान ले अपना
मिलते हाथ सबसे हैं दिल से दिल नहीं मिलते

करी थी प्यार की बाते कभी हमने भी फूलो से
शिकायत सबको उनसे है क़ी उनके लब नहीं हिलते

ज़माने की हकीकत को समझ जाओ तो अच्छा है
ख्बाबो में भी टूटे दिल सीने पर नहीं सिलते

कहने को तो ख्बाबो में हम उनके साथ रहते हैं
मुश्किल अपनी ये है कि हकीक़त में नहीं मिलते


मदन मोहन सक्सेना